Poem: Ek Shabd

कभी एक शब्द का मुझे
हर घड़ी इंतेज़ार रहता है
कभी एक शब्द के लिए
मेरा दिल बेकरार रहता है

कभी एक शब्द कैसे पल भर मैं
सारे रिश्ते बिखेर देता है
कभी एक शब्द हम को यादों के
जंगल मैं घेर लेता है

कभी एक शब्द दिल के दरिया मैं
कोई आस घोल जाता है
कभी एक शब्द जाने कितने दरवाज़े
एक घड़ी मैं खोल जाता है

उसी एक शब्द को कहे
कोई आज मुझ से भी
उसी एक शब्द का मुझे
हर घड़ी इंतेज़ार रहता है