उड़ चलो उड़ चलो

उन्मुक्त आसमान मैं, भय रहित उड़ चलो
बंधनों को तोड़ के, उड़ चलो उड़ चलो

काल के ललाट पर, चिन्ह छोड़ दो प्रबल
जोश की मशाल ले, उड़ चलो उड़ चलो

राह मैं जो आएँगी, मुश्किलें विशाल सी
तोड़ के हर ग्रहण, उड़ चलो उड़ चलो

है प्रकाश अल्प यहाँ, है तिमिर अति प्रचुर
ह्रदय से तुम प्रकाश कर, उड़ चलो उड़ चलो

विश्व मैं तो हैं कई, बाँटने के तंत्र षड्यंत्र
जोड़ने की लौ जला, उड़ चलो उड़ चलो

 

I used few lines from this poem in a ZopNow ad.