Poem : मुल्क आज़ाद हो गया है

अमन वाली बस्तियों में भी
दंगा फसाद हो गया है
अभी अभी खबर आयी है
मुल्क आज़ाद हो गया है
साठ बच्चे अस्पताल में
तड़प तड़प के मर गये
सियासत के दलालों का
घर आबाद हो गया है
अभी अभी खबर आयी है
मुल्क आज़ाद हो गया है
धर्म और ज़ुबान से थक जाते हैं
तो मुल्कों को लड़ाते हैं
तिरंगे में एक और जवान आया है
एक और घर बर्बाद हो गया है
अभी अभी खबर आयी है
मुल्क आज़ाद हो गया है
सहाफी बन बैठे हैं
आवाम के फ़र्ज़ी नुमाइंदे
फ़र्ज़ी खबरों का कारखाना
सियासत की बुनियाद हो गया है
अभी अभी खबर आयी है
मुल्क आज़ाद हो गया है
हुक्मरानी भी आज कल
हुक्मरान बच्चों में बाँट देते हैं
जम्हूरियत के धोखे में मुल्क
कुछ लोगों की ज़ायदाद हो गया है
अभी अभी खबर आयी है
मुल्क आज़ाद हो गया है