Poem : ज़िंदगी के धागे

ज़िंदगी के धागे बहुत कमज़ोर हो चले हैं टूटते तो हैं पर जुड़ते नहीं उलझ जाते हैं एक दूसरे से कभी लगते हैं मिलते हुए कभी लगते हैं एक विरोधाभास खुद से ही खुद का कभी कोई सोच और कभी कोई और मन का अंतर्द्वंद और वो भी अंतहीन कटुता के प्रतिबिंब कभी तो कभी … [Read more…]

Poem: जाने क्या

जाने क्या लिखा है किताबों में जाने क्या ये सब बोलते हैं बचपन को बंदूक की नोक पे धर्म के तराज़ू में तोलते हैं काटते हैं मासूमियत को हैवानियत की तलवार से ज़हर ये किस रंग का इंसानियत में घोलते हैं ना आँसू ही रुकते हैं ना लहू ही रुकता है धर्म की अंधी भगदड़ … [Read more…]

Poem : एक आह

  एक आह की ज़िंदगी भी आख़िर ज़िंदगी क्या होती है एक ज़ख़्म से उभरती है एक ज़ख़्म में फ़ना होती है क्या कहें किस से कहें ये ज़ुबान गद्दार है दर्द की इंतेहा तो बस आँखों से बयान होती है गुम हो जाएँगे हम भी आख़िर दस्तूर-ए-खुदाई है अभी तो रूह मेरी हर दिन … [Read more…]

The blue ticks of WhatsApp

So you have seen this feature already or not. A Blue tick indicates that the other side has read your message or not. Not sure what was their motivation, but this is going to create some interesting circumstances for sure. Whatsapp enables asynchronous communication and in asynchronous communication it is important that you can respond when … [Read more…]

How to make the damn thing scale

So all of us have been thinking how some of the websites are not able to take on the traffic they get exposed to. We have reached a critical mass in the industry and it is important for large internet companies to take this more seriously and also understand that scaling goes beyond adding hardware. … [Read more…]

Poem : बुलबुला

बुलबुला हूँ कुछ ही क्षण में क्षत विक्षत हो जाऊंगा पर अपने जीवन की अल्पता से मैं नहीं घबराऊंगा चाहे सतह पर ही हो मेरे सात रंगों की चमक चाहे अंतरमन में उपस्थित हो एकाकी शून्य तक एक बच्चे की ख़ुशी बन के मैं स्वयं ही बिखर जाऊंगा अपने जीवन की अल्पता से मैं नहीं … [Read more…]