Poem: ये सियासत भी

यहाँ सब पे इलज़ाम-ए-कौम-ए-बेवफाई है ये सियासत भी हमें कहाँ ले कर आई है सालों की दोस्तियां सियासती राय से टूटी जाती हैं ये सियासत भी हमें कहाँ ले कर आई है सदियों से रहे साथ उन को पाकिस्तान भेज देंगे ये सियासत भी हमें कहाँ ले कर आई है जिस को कहते हो मेरा … [Read more…]

Modi Hai toh Mumkin Hai – A Marketing Blunder

First Disclaimer : Before you jump on me this article is only about marketing aspects of the slogan. Second Disclaimer : Bad marketing does not mean that you will lose for sure. Sometimes money spent can compensate for bad quality of advertisement. Now let us come to the main issue. The first problem with this … [Read more…]

Poem: प्रयागराज

उत्तर प्रदेश में कानून का राज हो गया आखिर इलाहबाद अब प्रयागराज हो गया सालों से ना हुआ वो विकास आज हो गया आखिर इलाहबाद अब प्रयागराज हो गया गुंडों से भयमुक्त पूरा समाज हो गया आखिर इलाहबाद अब प्रयागराज हो गया देखो जंगल में भी राम राज हो गया आखिर इलाहबाद अब प्रयागराज हो गया

Poetry: जुनून और सुकून

जुनून और सुकून की ज़ंग बहुत अज़ीम है कभी चलते रहना भारी लगता है कभी ठहराव का बोझ बड़ा होता है चलते रहने में कई सवालात दिल को घेर लेते हैं कहाँ जा रहा हूँ कहाँ तक पहुँचा हूँ क्या यहीं आने के लिए निकला था और भी कई सवाल ना जवाब मिलता है कभी … [Read more…]

Poetry Recital at Lahe Lahe

कुछ मर गया है मुझ में इस लिए कविता लिखता हूँ कुछ लिखता हूँ अब बचे हुए खुद को ज़िंदा रखने के लिए यही सच है हर एक कवि के पीछे. कुछ दर्द के साए हैं जो बरस जाते हैं अनायास ही. कुछ इस बारिश से बिखर जाते हैं और कुछ इस बारिश से संवर … [Read more…]

Poem : सरहद

इक बार कभी इस सरहद पे कुछ ऐसा भी हो जाए तुम भी कुछ गीत सूनाओ हम भी कुछ गाने गायें   बहुत हो चुका खेल खून का अब थोड़ा संगीत करें तुम छेड़ो एक नुसरत की धुन हम भी रफ़ी के गीत कहें   माज़ी में तो खून है टपका तेरा भी और मेरा … [Read more…]