Poem: ये सियासत भी

यहाँ सब पे इलज़ाम-ए-कौम-ए-बेवफाई है
ये सियासत भी हमें कहाँ ले कर आई है

सालों की दोस्तियां सियासती राय से टूटी जाती हैं
ये सियासत भी हमें कहाँ ले कर आई है

सदियों से रहे साथ उन को पाकिस्तान भेज देंगे
ये सियासत भी हमें कहाँ ले कर आई है

जिस को कहते हो मेरा दुश्मन वो मेरा सुख दुःख का भाई है
ये सियासत भी हमें कहाँ ले कर आई है